Mar 8, 2017

🚩चौरासी सिद्ध

84 SIDHA




































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2. सनक नाथ जी
3. लंक्नाथ रवें जी
4. सनातन नाथ जी

6. चक्रनाथ जी
7. नरमी नाथ जी
8. रत्तन नाथ जी
9. श्रृंगेरी नाथ जी
10. सनंदन नाथ जी
11. निवृति नाथ जी
12. सनत कुमार जी
13. ज्वालेंद्र नाथ जी
14. सरस्वती नाथ जी
15. ब्राह्मी नाथ जी
16. प्रभुदेव नाथ जी
17. कनकी नाथ जी
18. धुन्धकर नाथ जी
19. नारद देव नाथ जी
20. मंजू नाथ जी
21. मानसी नाथ जी
22. वीर नाथ जी
23. हरिते नाथ जी
24. नागार्जुन नाथ जी
25. भुस्कई नाथ जी
26. मदर नाथ जी
27. गाहिनी नाथ जी
28. भूचर नाथ जी
29. हम्ब्ब नाथ जी
30. वक्र नाथ जी
31. चर्पट नाथ जी
32. बिलेश्याँ नाथ जी
33. कनिपा नाथ जी
34. बिर्बुंक नाथ जी
35. ज्ञानेश्वर नाथ जी
36. तारा नाथ जी
37. सुरानंद नाथ जी
38. सिद्ध बुध नाथ जी
39. भागे नाथ जी
40. पीपल नाथ जी
41. चंद्र नाथ जी
42. भद्र नाथ जी
43. एक नाथ जी
44. मानिक नाथ जी
45. गेहेल्लेअराव नाथ जी

47. बाबा मस्त नाथ जी
48. यज्यावालाक्य नाथ जी
49. गौर नाथ जी
50. तिन्तिनी नाथ जी
51. दया नाथ जी
52. हवाई नाथ जी
53. दरिया नाथ जी
54. खेचर नाथ जी
55. घोड़ा कोलिपा नाथ जी
56. संजी नाथ जी
57. सुखदेव नाथ जी
58. अघोअद नाथ जी
59. देव नाथ जी
60. प्रकाश नाथ जी

62. बालक नाथ जी
63. बाल्गुँदै नाथ जी
64. शबर नाथ जी
65. विरूपाक्ष नाथ जी
66. मल्लिका नाथ जी
67. गोपाल नाथ जी

69. अलालम नाथ जी
70. सिद्ध पढ़ नाथ जी
71. आडबंग नाथ जी
72. गौरव नाथ जी
73. धीर नाथ जी
74. सहिरोबा नाथ जी
75. प्रोद्ध नाथ जी
76. गरीब नाथ जी
77. काल नाथ जी
78. धरम नाथ जी
79. मेरु नाथ जी
80. सिद्धासन नाथ जी
81. सूरत नाथ जी
82. मर्कंदय नाथ जी
83. मीन नाथ जी
84. काक्चंदी नाथ जी



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Mar 6, 2017

🚩गंगा यमुना सरस्वती




ॐ गुरुजी आदेश गुरुजी सतगुरु को आदेश गुरुजी

कहते है की गंगा यमुना सरस्वती के संगम में स्नान करने पर बहुत पूण्य की प्राप्ति होती है 
सत्य है

ऐसा ही एक संगम हमारी काया में भी है
किंतु कहां है ये संगम??

यह सब हमारे शरीर में ही है
जो हमारी तीन प्रमुख नाड़ियाँ होती हैं
वही गंगा यमुना और सरस्वती है

इड़ा-----गंगा 
पिंगला ----------यमुना
सुषुम्ना------------------ सरस्वती
इस संगम में स्नान करने वाला धन्य हो जाता है और 
काशी की तरफ बढ़ता है

काशी ??
एक प्रकार से इड़ा नाड़ी को वरणा भी कहते हैं और पिंगला को असी कहते हैं।
और इन दोनों के मध्य में आज्ञा चक्र में स्वयं शिव अर्थात
 काशी विश्वनाथ विराजमान हैं। 
यही वाराणसी है।
यही तो काशी है
जो इस काशी विश्वनाथ जी के दर्शन करता हैं 
वह भवसागर से पार होता है वही दसम द्वार खोलता है"सोॐ'' 
जय श्री काशी विश्वेश्वर नाथ जी की जय 
आदेश आदेश आदेश


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Mar 2, 2017

🚩🚩 नाथ यंत्र, मन्त्र




**********नाथ यन्त्र, मन्त्र ***********



ॐ गुरूजी आदेश गुरूजी सतगुरुओ को आदेश गुरूजी

ॐ शून्य शून्य विदमहे प्रकाशस्वरूप धिमहि तन्नो अलखनिरंजन प्रचोदयात।।

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🌹आद्यान्तादिभ्यो मुक्तेsपि सर्वेषु यद् विद्यते, तस्मै महाशून्यप्रकाशमयाखिलाय नमः।।🌷

अर्थ :- जो आदि और अन्त से मुक्त होकर भी सभी में विधमान है उस महाशून्य प्रकाशमय अलख को हम नमन करते है।

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नाथ यन्त्र को पूजे, जो जन अपने हाथ
नवनाथ चौरासी सिद्धो की कृपा मिले अपार
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नाथ यन्त्र मन्त्र रचा, तुच्छ मती अनुसार
त्रुटि क्षमा करें नाथ योगी, कर लेना स्वीकार 
नहिं विद्या में निपुण हूँ, नहिं है ज्ञान विशेष 
गुरु-नाथ योगी जन को, आदेश नमन करे सोॐनाथ
ॐ गुरूजी आदेश गुरूजी सतगुरुओ को आदेश गुरूजी

          
       ******** सोॐनाथ ***********
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Mar 1, 2017

🚩बीज***अंकुर****पौधा***पेड़**** बीज






बीज***अंकुर****पौधा***पेड़



कहते है की बीज अगर धरती पर पड जाये तो अंकुरित हो जाते है 
चाहे उलटे पड़े या सीधे
बस समय समय पर पानी मिलता रहे

अर्थात :- ईश्वर की भक्ति प्रार्थना भी ऐसी ही है मन्त्र हो या न हो कोई बात नही
बस भाव होना चाहिए ।

अब एक बात और है ध्यान देने योग्य

कुछ मौसमी पौधे भी बनते है बीजो से जो कुछ ही दिनों में नष्ट भी हो जाते है

अर्थात :- जो धीरे धीरे अंकुरित होते है वे ही पेड़ बनते है ।
इसलिए सयम और विश्वास होना अति आवश्यक है। 
पग पग जो धरता है शिखर तक जाता है।

इसलिए सयम और विश्वास भी बहुत जरुरी है भाव के साथ

 एक बीज लगाओ और उसे रोज रोज निकाल कर देखोगे तो वो कभी भी अंकुरित नही हो सकता 
पौधा और पेड़ तो बहुत बड़ी बात है।

हमे अपनी बुद्धि को थैला नही बनाना चाहिए की जो मिले ठूस लो 
ज्ञान की जगह हम जानकारी इस थैले में भरते रहते है 
जो भी मिलता है 
जहां से मिलता है 
 जैसा भी मिलता है
और और और
अच्छे वचन भी इसमें 
बुरे वचन भी इसमें 
किसी ने गलत बोला या गाली गलोच की वो भी इसमें 
किसी ने अच्छी बात बोली या गुरुजनो की वाणी या मन्त्र वो भी इसमें
सब अच्छा बुरा भला सब ही तो है इसमें

यह सब ज्ञान नहीं है 
ये मात्र जानकारियां ही है 
क्योंकि ज्ञान तो वही है जो अपने अनुभव से मिलता है"सोॐ'' 
सभी जानकारी का मन्थन करना पड़ेगा



��जय गुरुदेव धर्मनाथ जी को आदेश��


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